गुरुवार, 20 जुलाई 2017

२६ जुलाई और १५ सितम्बर की नजदीकी तिथियों में बड़े तूफान की संभावना


यह भविष्यवाणी बिल्कुल ज्योतिषीय है और इसकी पुष्टि सम्बन्धित तिथियों के आगमन के  दो-तीन दिन पहले मौसम विभाग स्वयं करेगा, ऐसा मेरा अनुमान है। हजारों मील दूर रहकर मानव-निर्मित प्रक्षेपित सेटेलाइट प्रतिदिन बहुत सारी सूचनाएं प्रदान करके संचार व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करते आ रहें हैं । सेटेलाइट से प्राप्त आकाशीय चित्रों की मदद से  वे यह भी सूचित करते हैं , कब, कहाँ कितनी बर्षा हो सकती है। करोड़ों मील दूर रहकर प्रकृति-प्रदत्त ग्रह या आकाशीय पिंड भी हमे बहुत सारी सूचनाएँ बर्षों पूर्व दे देते है। उन सूचनाओं को पढ़ने और समझने के लिए हमें केवल पृथ्वी सापेक्ष ग्रहों के गति का ज्ञान होना चाहिए।

गत्यात्मक ज्योतिष, सिद्धांत के अनुसार 26 जुलाई और 15 सितंबर (या इन तिथियों के आसपास) तूफान आ सकता है। इसपर बहुत सारे प्रश्न आ सकते हैं, जैसे- विश्व के किस भाग में, कितनी तीव्रता में आदि। उत्तर में मैं यही कहूंगा - नजदीक के चश्मे से आप नजदीक की चीजें स्पष्टतः देखते हैं, लेकिन दूर के चश्मे से दूरस्थ चीजें ही आप देख पाते हैं। दोनों की अपनी सीमाएं होती हैं। जैसे कि मैंने कहा, 26 जुलाई और 15 सितंबर के आसपास की तिथियों में विश्व के कई भागों में छोटे बड़े तूफान आएंगे, इनमे से एक दो तबाही मचाने वाले भी सिद्ध हो सकते हैं। इसके अलावा उपरोक्त तिथियों के आसपास ही कई स्थानों में बादल फटने की घटनाएँ, मूसलाधार बारिश, ओला वृष्टि तथा अधिकाँश स्थानों में बादलों की उपस्थिति देखी जा सकती हैI देश या स्थानों का नाम मौसम विभाग सैटेलाइट चित्रों के द्वारा यानी नजदीकी चश्मों से ही देखकर बता सकता है।

उपरोक्त तिथियों के अलावा, 13 अगस्त से 26 अगस्त तक कुछ स्थानों में अविस्मरणीय मूसलाधार वर्षा हो सकती है तथा 25-26 अगस्त के आसपास कोई प्राकृतिक आपदा जैसे भूकंप, भूस्खलन, ज्वालामुखी विस्फोट या कोई अन्य तरह की दुर्घटना आदि की भी संभावना दिखती हैI

दूसरी तिथि में तूफानी वर्षा 15 सितंबर के आसपास की तिथियों में होगी, उसके बाद मानसून धीरे धीरे वापसी के क्रम में अपनी तीव्रता कम करता चला जायेगा। किसान अच्छी तरह से जानते हैं कि 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक खेती के लिए पानी का क्या महत्व है। 15 सितंबर के आसपास तूफानी वर्षा के जल को किसान खेतो में रोकने की चेष्टा करें, तो मामूली वर्षा से भी सितंबर के अंत तक फसल के तैयार होने के क्रम में पानी काफी काम आता है। लेकिन अक्टूबर में अगर कम बारिश हुई तो मौसम में भारी वर्षा होने का कोई अर्थ नही रह जाएगा क्योंकि वैसे भी कहा गया है- 'क्या बरखा जब कृषि सुखाने' अक्टूबर के मध्य में कई शुभ ग्रहों के होने से कई जगहों पर बारिश की संभावना से इनकार नही किया जा सकता , लेकिन शनि -मंगल के बीच इनके आ जाने से कई जगहों में सुखाड़ की स्थिति भी बनती है। इसपर सरकार की पैनी नजर होनी चाहिए। हिन्दी_ब्लॉगिंग

विद्या सागर महथा ,
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